29.4.09
हाय गरमी
सूरज गुस्से में है। आसमान उबल रहा है। सड़क जूतों पर चिपकने लगी हैं। अगर चिल्लायें तो आवाज पिघल कर टपक जाए। गहरी साँस लें तो नाक के भीतर के रोयें झुलस जाएँ । सुनते थे क्रिस्तानी नर्क में बहुत गरमी है। कहीं वो नर्क पाताल से उठ कर जमीन पर तो नहीं आ गया है।
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