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29.5.14

how to be a Spaniard

एक उम्र के बाद हर नयी चीज़ किसी पुरानी चीज़ की याद दिलाने लगती है. लगता है सब देख लिया, सब सुन लिया, सब चख लिया, सब भोग लिया. पर शुक्र है ऐसा होता नहीं. घुमक्कड़ी वो जादू है जो इस आदत, इस familiarity, का चश्मा झटके से उतार कर आँखों को फ़िर दुनिया से दो-चार करा देता है. हर अनुभूति फ़िर नयी व रसमय हो जाती है. मौसम खुशनुमा लगता है, लोग अच्छे लगते हैं, स्वाद चटपटे हो जाते हैं और उम्र काफ़ी कम.

कुछ ही दिनों में निकल पडूंगा मैं- स्पेन की यात्रा पे. पेट में हौल सी हो रही है, जैसा बचपन में तोहफे खोलते वक़्त होता था. या फ़िर याद है, लड़कपन में किसी लड़की से प्यार होने पर रात-रात भर सोचते थे कि इसका इज़हार कैसे करेंगे, इज़हार करने के बाद क्या होगा. यानी इस गुदगुदी में थोडा भय भी सम्मिश्रित है. सब ठीक तो रहेगा न, रास्ता तो नहीं भूलेंगे, ज्यादा खर्चा तो नहीं होगा, सही सलामत वापस तो आयेंगे ना. शायद कहीं ये सवाल भी खुदबुदा रहे हैं. और इस से जाने का मज़ा कई गुना हो जाता है. सचमुच, अकेले घुमक्कड़ी का आनंद ही कुछ और है.


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