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Writer, Father. Entrepreneur. Bum. Atheist. Recluse. Garhwali. Foodie. Downloader. Drifter. In no particular order.

7.12.15

the lizard king

करीब 14 साल की उमर में मैंने जिम मौरीसन के बारे में पहली बार पढ़ा. याद नहीं कौन से अंग्रेज़ी अखबार की सन्डे मैगज़ीन हुआ करती थी (शायद Sunday Observer). उसकी बेलगाम क्रिएटिविटी और असमय मृत्यु ने मेरे नवयुवा, लेकिन सहज existentialist अंतर्मन पर गहरा प्रभाव डाला. पालिका से उसका पायरेटेड ग्रेटेस्ट हिट्स कैसेट खरीद कर सुना. फिर 1991 में ऑलिवर स्टोन की बायोपिक The Doors आई जिसमें Val Kilmer ने इस darkly enigmatic व्यक्तित्व को जीवंत कर दिया. तो कुछ इस तरह जिम मेरी आतंरिक माइथोलॉजी का एक स्थाई पात्र बन गया.

फिर मैं जैसे जैसे बढ़ा होने लगा, मुझे लगने लगा कि जिम एक फ़क़ीर नहीं बल्कि एक फेकर था. उसकी लिरिक्स भी काफ़ी हल्की तुकबंदी सी प्रतीत होने लगी.

करीब 30 की उमर में मैंने जिम की बायोग्राफी पढ़ी (Jim Morrison: Life, Death, Legend by Stephen Davis). साथ ही मैंने लिरिक्स के परे Doors की Jazz Rock शैली को musically सराहना शुरू किया. अब मुझे जिम कुछ कुछ समझ आने लगा. उसका freewheeling लिरिकल स्टाइल जो सबकौंशस व id को बिना इंटेलेक्चुअल हस्तक्षेप या फ़िल्टरिंग के कागज़ पर उतार देता था, Densmore की jazz drumming, शॉक व theatricality के एलेमेंट्स के बेहतरीन उपयोग के लिए एक नया आदर उपजा. खास तौर पे Morrison Hotel और L.A. Woman एलबम्स के लिए, जिम के भीतर के Adonis, Bacchus, Rimbaud व इण्डियन shaman के अनूठे सम्मिश्रण के लिए.

आज 8 दिसंबर है, जिम का 72वां जन्मदिवस. तो हैप्पी बर्थडे मिस्टर Mojo Risin. May you keep on rising.

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